शुक्रवार, 9 अक्तूबर 2009

पेड़ की तरह

एक पेड़ की तरह हो
हम सबका जीना
उम्र भर का हरापन
ऋतुओं का प्राणदायी आवर्तन
कुछ रंग कुछ गंध
कुछ फूल-फल
शीतलता जीवन की
और भरपूर समिधाएं

कब आयेगा वह दिन
जब काटे जाने पर भी 
नहीं जागेगी मुझमें 
बदला लेने की इच्छा

2 टिप्‍पणियां:

  1. कब आयेगा वह दिन
    जब काटे जाने पर भी
    नहीं जागेगी मुझमें
    बदला लेने की इच्छा

    -बहुत गहरी बात कह दी आपने!! वाह!

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  2. बहुत गहरी बात के साथ बढ़िया प्रस्तुती |

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